ांगाल की ओर कूच कर गया हाथियों का झुंड

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100 साल में सबसे ज्यादा बारिश वाला मार्च

नई दिल्ली : भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने आज कहा कि यह मार्च पिछले 100 साल में सबसे ज्यादा बारिश वाला मार्च का महीना रहा। इसके साथ ही मौसम विभाग ने अगले दो हफ्तों में और बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। आईएमडी के महानिदेशक एलएस राठौड ने कहा कि बारिश की वजह से देश के कई हिस्सों में सामान्य फसलों और सब्जियों के साथ ही बागवानी वाली फसलों को भी भारी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है। हालांकि हम सब जानते हैं कि मार्च में काफी बारिश हुई। उन्होंने कहा कि 1915 के बाद से ही यह सबसे ज्यादा बारिश वाला मार्च रहा, खासकर उत्तर भारत में। इसके साथ ही उन्होंने अगले दो हफ्तों के दौरान भी बारिश होने की संभावना व्यक्त की। इस बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की सीमा बढ़ाने की खातिर केंद्र राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगा। खराब मौसम के कारण देश के 14 राज्यों में 106.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसल को नुकसान हुआ है।

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दक्षिण पूर्व रेलवे रांची को तीसरा स्थान

रांची : मुंबई में खेले गए आॅल इंडिया रेलवे महिला हॉकी चैंपियनशिप में दक्षिण पूर्व रेलवे रांची  की खिलाड़ियों सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया। खेले गए तीसरे और चौथे स्थान के मैच में दक्षिण पूर्व रेलवे रांची ने एकतरफा मुकाबले में उत्तरी रेलवे, दिल्ली जैसी मजबूत टीम को 5-0 से रौंद डाला।
टीम की ओर से विनिता खेस, निक्की प्रधान, माधुरी टेटे, कविता मौर्य और अनिमा मिंज ने गोल किये।
इस चैंपियनशिप का खिताब रेल कोच फैक्टरी कपूरथला ने फाइनल मुकाबले में सेंट्रल रेलवे को 1-0 से हराकर कब्जा किया।

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फाइनल मैच के यादगार पल

फाइनल में आस्ट्रेलिया के कप्तान माइक क्लार्क ने अपने आखिरी वनडे मैच में 74 रनों की पारी खेल टीम को चैंपियन बनने में अहम भूमिका निभाई। क्लार्क ने इस दौरान 72 गेंदों का सामना किया। 10 चौके और एक छक्के जडेÞ, स्ट्राइक रेट 102.77 रहा।

2015 आइसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप के ब्रांड एंबेसडर भारत के सचिन तेंदुलकर ने आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क को मैन आॅफ द सीरीज का मोमेंटो प्रदान किया। स्टार्क 22 विकेट लिए।

फाइनल मैच के मैन आॅफ द मैच आस्ट्रेलिया टीम के जेम्स फॉक्नर हुए। फॉक्नर ने नौ ओवर की गेंदबाजी में 36 रन देकर 3 विकेट लिए।

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सायना ने फिर रचा इतिहास जीता इंडिया ओपन खिताब

नई दिल्ली : एक के बाद एक उपलब्धि अपने नाम करते हुए देश की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने रविवार को इंडिया ओपन वर्ल्ड सुपरसीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट जीत लिया। राजधानी के सिरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुए फाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीय सायना ने थाईलैंड की रातचानोक इंतानोन को सीधे गेमों में 21-16, 21-14 से मात दे दी। सीधे गेमों में मैच समाप्त होने के बावजूद मैच 50 मिनट तक चला। खेल प्रशंसकों से खचाखच भरे कोर्ट-1 में सायना पूरे आत्मविश्वास से कोर्ट पर उतरीं और पहले गेम में शुरुआत से ही अपना दबदबा बना लिया। एक समय 12-5 की बढ़त ले चुकीं सायना को हालांकि इंतानोन ने संघर्ष कर 10-12 तक पहुंचा दिया। सायना लेकिन पहले गेम में एक बार भी पीछे नहीं हुई हैं और सर्वाधिक छह अंक लगातार अर्जित करते हुए जीत लिया। सायना के हर बेहतरीन शॉट पर दशर्कों ने उनका जमकर उत्साहवर्द्धन किया। दूसरे गेम में भी सायना ने पांच लगातार जीतते हुए जबरदस्त शुरुआत की और पूरे गेम के दौरान एक बार भी पीछे नहीं हुईं और दूसरा गेम जीतने के साथ ही सायना ने करियर का पहला इंडियन ओपन खिताब जीत लिया। गौरतलब है कि सायना का अगले सप्ताह जारी होने वाली विश्व बैडमिंटन संघ (बीडब्ल्यूएफ) की वरीयता सूची में शीर्ष पर पहुंचना तय है और इंडिया ओपन में खिताबी जीत के साथ उन्होंने शीर्ष पर अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है।

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हिन्दू भाइयों ने भी इज्ज़त के साथ दी पनाह: शेख

साइकिल से हज करने निकले युवक का हुआ स्वागत
कुडू-लोहरदगा: साईकल से सऊदी अरब के मक्का मदीना हज करने के इरादे से निकले केसरपुर जिला कटक ओडिशा के रहने वाले 40 वर्षीय शेख वासित का शनिवार को कुडू पहुंचने पर ज़ोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि घर से निकले हुए आज 19वां दिन है मयुरगंज, जोड़ा बड्बिल, चाईबासा, चकरधरपुर, रांची होते हुए कुडू पहुंचा हूं और अल्लाह ने चाहा तो तिन से चार माह में अपने सफर को पूरा कर मंजिल तक पहुंचने में कामयाब हो जाऊंगा। यहां तक के सफर में मुझे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई है सभी लोगों का साथ मिला रात कभी मस्जिद, पुलिस थानों में कभी किसी के घर में गुज़रता हुआ यहां पहुचा हूं कई बार हिन्दू भाइयों ने भी इज्ज़त के साथ मुझे पनाह दी और वहां पहुंचकर दुवा करने की गुज़ारिश की। सुविधा भरे इस यग में भी साइकल से इतनी लम्बी दुरी तय किये जाने के बारे में उन्होंने बताया की फजाएल आमाल नामक एक किताब में पैदल हज करने की खासियत के बारे पढ़कर मैंने मन बनाया की मुझे भी इसी तरह हज कर सवाब हासिल करना है। इससे पहले भी वर्ष 2013 में वासित ने कोशिश की थी लेकिन लगभग आधा सफर तय करने के बाद सुरक्षा कारणों से पकिस्तान बोर्डर से ही लौटा दिया गया था। कुडू में स्वागत करने वालों में अंजुमन इस्लामिया के सरपरस्त ज़फर खान, जिब्रील खलीफा, शमशेर खान, सब्बीर अंसारी, लाला बाबू, अख्तर खान सहित कई लोग शामिल थे।

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! आम आदमी पार्टी से आगे भी जहां है

उन सुलह-सपाटों का कोई फल नहीं निकला जिसके लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया के बहुत सारे मित्र महीनों से लगे हुए थे। आम आदमी पार्टी के नेताओं के जितने सारे इंटरव्यू देखिये, उसमें तल्ख सवाल कम, और सुलह का रास्ता निकालने की बातें ज्यादा होती थीं। इस देश के कई सारे चैनल विवाद समाधान समिति और पंचायत केंद्र में परिवर्तित हो गये थे। लेकिन राजनीति के हिमालय से जो गंगा निकली है, तेजी से प्रदूषित होकर नाले में परिवर्तित हो रही है। हिमालय का राजनीति से पुराना नाता रहा है। उसकी गोद से राजनीति अवश्य प्रस्फुटित होती है, लेकिन मैदानी इलाके में आते-आते राजनीति की यह गंगा, क्यों प्रदूषित हो जाती है? इस सवाल का उत्तर नेपाली माओवादियों, और असमगण परिषद के नेताओं से भी लेना होगा। इन दोनों पार्टियों में वैकल्पिक राजनीति की तलाश दक्षिण एशिया के मतदाताओं ने की थी। इस विफल प्रयोग के अरसे बाद, आम आदमी पार्टी में वैकल्पिक राजनीति का अक्स ढूंढा जाने लगा था। आम आदमी पार्टी पर अब शनि दृष्टि पड़ चुकी है। सड़क से सदन (दिल्ली विधानसभा) तक पहुंची इस पार्टी के नेता, एक बार फिर सड़क पर हैं। मतभेद सार्वजनिक करने के वे सारे अफसोस, कसमें-वादे गुरुवार को हवा हो चुके थे। दोनों धड़े मीडिया वार में जुटे हुए थे। हर पक्ष खुद को सही साबित करने, और स्वराज की व्याख्या अपने-अपने तरीके से कर रहा था। 1915-16 में स्वयं महात्मा गांधी स्वराज शब्द को लेकर संतुष्ट नहीं थे। यंग इंडिया में उन्होंने एक बार लिखा था, इंडिपेंडेंस के लिए आखिर ऐसा कोई स्वदेशी शब्द तो चाहिए, जिसे तीस करोड़ लोग समझते हों। ऐसा शब्द दिखता है-स्वराज!  बकौल महात्मा गांधी, स्वराज शब्द का पहले-पहल प्रयोग दादा भाई नौरोजी ने किया था। यह शब्द स्वतंत्रता से काफी-कुछ अधिक का द्योतक है।  गांधी के बाद विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण ने स्वराज का मशाल थामा था। स्वराज पाने के उद्देश्यों पर जितनी बहस महात्मा गांधी के समय हुई, उसका निष्कर्ष यही था कि हिन्दुस्तानी जनता की इच्छानुसार पार्लियामेंट्री ढंग का स्वराज पाने के लिए सामूहिक प्रयास। गांधी ने स्पष्ट किया था कि स्वराज पाने के लिए सत्य, अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए पुरुषार्थ और त्याग आवश्यक है। आम आदमी पार्टी ने जिस स्वराज यात्रा की शुरूआत की थी, क्या उसमें सत्य, अहिंसा, पुरूषार्थ और त्याग जैसे चारों तत्व हैं? महात्मा गांधी, बहादुरी के अर्थ में पुरुषार्थ शब्द का प्रयोग करते थे। इसी पुरुषार्थ का दुरुपयोग अब शायद आम आदमी पार्टी में हो रहा है। पुरुषार्थ प्रयोग में कौन, किस पर भारी पड़ता है, इसका फैसला शनिवार को हो गया। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव आम आदमी पार्टी की राष्टÑीय कार्यकारिणी से निकाले जा  चुके हैं। इस लड़ाई का असर पार्टी को रोजाना होने वाली आमदनी पर भी पड़ रहा है। कहां एक रात में दो करोड़ का डोनेशन मिलता था, और अब 25 मार्च को मात्र 733 (सात सौ तैंतीस) रुपये, और 26 मार्च को सिर्फ 264 (दो सौ चौंसठ) रुपये आम आदमी पार्टी को दान में मिले हैं। आम आदमी पार्टी का सेंसेक्स इतना नीचे गिर जाएगा, ऐसी कल्पना किसी कटोराधारी ने भी नहीं की होगी। क्या वे दिन थे, जब लंच के बदले व्यापारियों से केजरीवाल बीस लाख रुपये दान में वसूल लेते थे। गांधी जी जीवित होते, तो उन्हें इसका अफसोस होता कि आज के स्वराजी नेताओं के साथ लंच करना इस देश में सस्ता नहीं है। चुनाव के दिनों में कम से कम पच्चीस हजार की केजरीवाल प्लेट होती थी। दान की राशि में इतनी गिरावट के पीछे क्या प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की जोड़ी षडयंत्र कर रही है? प्रशांत भूषण-योंगेंद्र यादव की जोड़ी दो करोड़ के चार चेक पाने, आप प्रत्याशी के गोदाम से शराब की बोतलें मिलने के बावजूद चुनाव लड़ाने, पार्टी को आरटीआई के अंतर्गत लाने और अरविंद केजरीवाल को राष्टÑीय संयोजक पद पर बने रहने के चार यक्ष प्रश्नों से पीछे नहीं हटी। लेकिन प्रशांत भूषण पर परिवारवाद का ब्रह्मास्त्र तब चलाया गया, जब केजरीवाल एंड कंपनी को लग गया कि दिल्ली चुनाव के लिए विदेश से दान को रोका जा रहा है। प्रश्न यह है कि नवंबर 2012 में जब शांति भूषण आम आदमी पार्टी को एक करोड़ रुपये का दान कर रहे थे, तब से लेकर छह माह पहले तक यह पार्टी उनके परिवारवाद को क्यों बर्दाश्त कर रही थी? चुनाव जीतने के बाद पटेल नगर कार्यालय के प्राचीर से केजरीवाल विजय वक्तव्य देते वक्त अपनी पत्नी सुनीता के साथ विक्टरी का वी निशान बना रहे थे, और जीत का श्रेय अपने पिता और पत्नी को दे रहे थे, तो क्या वह परिवारवाद नहीं था? इस अवसर पर कुमार विश्वास भी अपनी पत्नी डॉ. मंजू शर्मा के साथ पटेल नगर पार्टी मुख्यालय के परकोटे पर नमूदार थे। लोगों को अच्छी तरह याद है, जब 49 दिन वाली पिछली सरकार में विधानसभा के अंतिम दिन केजरीवाल परिवार, दर्शक दीर्घा में उपस्थित था। और इस बार चुनाव परिणाम के तुरंत बाद केजरीवाल का कौशांबी निवास उनके रिश्तेदारों से भर गया था। क्या यह परिवारवाद नहीं है? अरविंद केजरीवाल में हन्ता वृत्ति (किलर इन्सटिंग्ट) भयानक रूप से है, यह उनके इनर सर्किल के लोग भी स्वीकार करते हैं। मफलर के बरक्स, देहाती गमछा लगाये योगेंद्र यादव अत्यंत विनम्र, मृदुभाषी प्रवक्ता और अहिंसा का पुजारी जैसी छवि आम जनता के बीच बना चुके हैं। केजरीवाल कोटरी इस बात से डरती रही है कि योगेंद्र यादव की अहिंसा में बहुत बड़ी हिंसा छिपी हुई है। समय आने पर   योगेंद्र में बड़े-बड़ों को नाप देने की क्षमता है, इसमें जेएनयू के उनके बाकी साथियों प्रोफेसर आनंद कुमार, कमल मित्र चिनाय को संदेह नहीं है। केजरीवाल पांच साल दिल्ली की गद्दी से चिपके रहें, यहां तक तो ठीक है, लेकिन पार्टी के राष्ट्रव्यापी विस्तार की कमान योगेंद्र-प्रशांत की जोड़ी के पास क्यों नहीं हो? विवाद के केंद्र में यही बात थी। आम आदमी पार्टी देश के सभी राज्यों में मिशन विस्तार में लगी है, यह उसकी वेबसाइट को देखने पर भी लग जाता है। योगेंद्र को किसान आंदोलन से जोड़कर दक्षिण भारत की ओर कूच कराने की योजना को पार्टी का साधारण कार्यकर्ता भी समझता है कि उन्हें कालापानी भेजने की तैयारी चल रही थी। योगेंद्र यादव हरियाणा को अपनी राजनीति की धुरी बनाये रखना चाहते हैं, उसकी धार कम करने के लिए उनके पीछे नवीन जयहिंद को जान-बूझकर लगाया गया था। स्वराज और आरटीआई के बूते अपनी राजनीति की धार तेज करने वाले नवीन जयहिंद से शायद ही योगेंद्र यादव की कभी बनी हो। यह नवीन जयहिंद थे, जिन्होंने योगेंद्र-प्रशांत की जोड़ी को राष्टÑीय कार्यकारिणी से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा था। उसके बाद अंजली दमानिया जैसी नेता ने पार्टी छोड़ी तो लग गया था कि तूफान को आना है। किरण बेदी, शाजिया इल्मी, दिलीप पांडे, विनोद कुमार बिन्नी जैसे नेता जब भाजपा में शामिल हो रहे थे, तो सबको लग रहा था कि ये लोग अवसरवादी हैं, या फिर अपरिपक्व राजनीति कर रहे हैं। आज की तारीख में इन नेताओं से बात कीजिए, और उनके चेहरे को देखिये; तो इस बात का संतोष दिखता है कि उनका फैसला सही था। हालांकि भाजपा नामक समंदर में ये लोग समय के साथ शायद विलीन भी हो सकते हैं। तीस साल पहले आम आदमी पार्टी की तरह का ही एक प्रयोग असम में हुआ था। 15 अगस्त 1985 को असम समझौते के बाद दिसंबर में वहां चुनाव हुआ था, और असमगण परिषद् सत्ता में आई थी।

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रामनवमी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

संवाददाता
रांची : रामनवमी को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। सभी चौक चौराहों पर दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति में पुलिस बल की तैनाती कर दी है। यह तैनाती शुक्रवार से ही शहर में दिखेगी। प्रतिनियुक्ति 29 को झांकी लौटने तक रहेगी। इस दौरान सभी थानेदारों को अपने अपने इलाके में सक्रियता बढ़ाने का निर्देश दिया गया है और अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इसके लिए पुलिसकर्मियों को सादे लिबास में चौक चौराहों पर सक्रिय रह कर नजर रखने को कहा गया है। रामनवमी की मुख्य झांकी को ध्यान में रखते हुए मेन रोड को जोड़ने वाली कुछ सड़कों पर बैरेकेडिंग की जा रही है। इसी तरह का इंतजाम डोरंडा में भी पुलिस ने किया है। जिला पुलिस के कम्पोजिट कंट्रोल रूम को मुख्य कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसके अतिरिक्त अलबर्ट एक्का चौक और डोरंडा में भी अस्थायी कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है, ताकि हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा बुंडू अनुमंडल में भी एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। सभी कंट्रोल रूम के पास दमकल, एम्बुलेंस से लेकर अतिरिक्त पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गयी है। सभी थानों की पुलिस को अपने-अपने इलाके में गश्ती बढ़ाने के लिए कहा गया है। साथ ही सभी इलाकों के लिए अलग से गश्ती दल का भी गठन किया गया है। जिन मार्गों में रौशन की जरूरत है वहां नगर निगम के सहयोग से प्रकाश की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही झांकी के मार्ग पर अस्थायी प्याऊ का भी इंतजाम किया जा रहा है।

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शपथ ग्रहण समारोह के लिए रांची तैयार

रघुवर  के साथ 4 विघायक लेगें  शपथ

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मोदी का आना तय, एसपीजी टीम पहुंची

संवाददाता
रांची : रघुवर दास के राजतिलक के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पहुंचना तय हो गया है। पीएम की सुरक्षा में लगे एसपीजी की 28 सदस्यीय टीम शुक्रवार की देर शाम वायुसेना के विशेष विमान से रांची पहुंच गयी। डीआइजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पहुंचे इस दल के साथ पीएम के वाहनों का पूरा काफिला भी रांची पहुंच गया है। 28 दिसंबर को मोरहाबादी स्थित फुटबॉल ग्राउंड में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में पीएम के अतिरिक्त आठ राज्यों के मुख्यमंत्री और 16 केंद्रीय मंत्रियों के भी शामिल होने की खबर है। वीवीआईपी के शामिल होने के कारण एसपीजी ने तैयारी शुरू कर दी है। रात में ही एसपीजी की टीम जिला पुलिस के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित समारोह स्थल मोरहाबादी फुटबॉल ग्राउंड पहुंची और पूरे मैदान का जायजा लिया। इसके बाद एसपीजी ने समारोह स्थल को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। शनिवार को पीएम के कार्यक्रम का पूर्वाभ्यास होगा। प्रधानमंत्री विशेष विमान से बिरसा मुंडा हवाई अड्डा पहुंचेंगे और वहां से चौपड़ से मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे। वहीं दूसरी ओर जिला पुलिस-प्रशासन भी पीएम के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए रेस हो गयी है। सभी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गयी है।

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