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छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश पर रोक को लेकर विवाद, सरकार ने AMU से स्पष्टीकरण मांगा

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति जमीरूद्दीन शाह के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया कि पुस्तकालय में स्नातक की छात्राओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद ‘अधिक संख्या’ में लड़के आने लगेंगे। उनके इस बयान के बाद सरकार ने मंगलवार को विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यह ‘बेटियों के अपमान’ की तरह है।

स्नातक की लड़कियों पर प्रतिबंध को लेकर विवाद के घेरे में आए एएमयू ने जगह की कमी का हवाला दिया और ‘लैंगिक भेदभाव’ के आरोपों से इंकार किया। इसका गंभीर संज्ञान लेते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने एएमयू के उपकुलपति जमीरूद्दीन शाह से जवाब मांगा है और ईरानी ने कहा कि शिक्षा एवं संवैधानिक अधिकार सभी के लिए बराबर है।

ईरानी ने दिल्ली में एक समारोह के इतर कहा, ‘ऐसी खबर है जो महिला के तौर पर आहत करती है और आंदोलित भी करती है कि जब हमें स्वतंत्रता मिली तो माना जाता था कि शिक्षा एवं संवैधानिक अधिकार सभी के लिए बराबर है.. और अब हमें ऐसी खबरें मिल रही हैं जो बेटियों के अपमान की तरह है।’ आलोचनाओं का सामना कर रहे उपकुलपति ने जवाब दिया कि परिसर के बाहर महिला कॉलेज में पढ़ रही छात्रओं को 1960 में मौलाना आजाद पुस्ताकलय की स्थापना के समय से ही प्रवेश प्रतिबंधित है और यह ‘नया प्रतिबंध नहीं’ है।

उन्होंने कहा कि 4000 से ज्यादा स्नातक की छात्राएं हैं और जगह की कमी के कारण वे पुस्तकालय में नहीं बैठ सकतीं। उनकी इस टिप्पणी का कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने कड़ा विरोध किया कि अगर लड़कियों को अनुमति दी जाती है तो पुस्तकालय में ‘अधिक लड़के’ आएंगे। शाह ने कहा कि ‘मौलाना आजाद पुस्तकालय की स्थापना के समय से ही सभी परास्नातक लड़कियों एवं महिला शोधार्थियों को यहां आने की अनुमति है।’ उन्होंने लैंगिक भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘न केवल भ्रामक बल्कि शरारतपूर्ण और मानहानिपूर्ण’ करार दिया।

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने उपकुलपति की टिप्पणी को ‘भयावह’ एवं ‘स्तब्धकारी’ करार दिया जबकि मंत्रालय में नये राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां ‘सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं’ हैं। हेपतुल्ला ने कहा, ‘मैं इसे भयावह मानती हूं खासकर मौलाना आजाद की जयंती के अवसर पर। आजाद ने 62 वर्ष पहले लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया था। मैं वास्तव में आश्चर्यचकित हूं। आज के दिन किसी संस्थान का प्रमुख इस तरह की बात करे तो यह स्तब्ध करने वाला है।’ सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि मुद्दे के समाधान के बजाए ‘किसी को जाने से (पुस्तकालय में) रोकना ठीक नहीं है। व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि सभी विद्यार्थी पुस्तकालय जाएं और अध्ययन कर सकें।’

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छत्तीसगढ़ मे नसबंदी के बाद 11महिलाओं की मौत, 4 निलंबित

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरकार द्वारा संचालित एक शिविर में नसबंदी के बाद उत्पन्न जटिलताओं के चलते जान गंवाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 11 हो गई है जबकि लगभग 50 अन्य को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सरकार ने चार चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है जबकि स्वास्थ्य सेवा निदेशक का स्थानांतरण किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) के चार चिकित्सकों के एक दल को पीड़ित महिलाओं के उपचार के लिए एक विशेष विमान से बिलासपुर भेजा जा रहा है।

बिलासपुर जिले के कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने बताया कि जिले के सकरी (पेंडारी) गांव में शनिवार को एक निजी अस्पताल में शासकीय परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिविर में 83 महिलाओं का आपरेशन किया गया था। बाद में 60 महिलाओं ने उल्टी और सिरदर्द की शिकायत की तब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

उन्होंने बताया कि अभी तक इस घटना में 11 महिलाओं की मौत हो गई है। जान गंवाने वाली सभी महिलाओं की उम्र 32 साल से कम है। बिलासपुर में नसबंदी के दौरान महिलाओं की मौत के मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से पूरे मामले में विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो 10 दिन की तीन देशों की विदेश यात्रा पर आज रवाना हुए, ने इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे पर म्यांमार से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से बात की और इस घटना के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने सिंह से इस संबंध में गहन जांच और कार्रवाई करने को कहा।

आसियान और पूर्व एशिया शिखर-सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज सुबह म्यांमार रवाना हुए और इस देश की राजधानी ने पई ताव पहुंचे मोदी ने इस मामले में सिंह से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर बताया, ‘प्रधानमंत्री ने बिलासपुर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से बात की। प्रधानमंत्री ने दुखद घटना पर चिंता प्रकट की।’ विपक्षी कांग्रेस की आलोचना के निशाने पर आये मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच में दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य शासन ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक डाक्टर कमलप्रीत को हटा दिया तथा इस मामले में लापरवाही बरतने के कारण स्वास्थ्य विभाग के चार अधिकारियों परिवार कल्याण कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डाक्टर के. सी. ओराम, बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर एस. सी. भांगे, तखतपुर के खंड चिकित्सा अधिकारी डाक्टर प्रमोद तिवारी और एक सरकारी सर्जन डाक्टर आर. के. गुप्ता को निलंबित कर दिया।

रमन सिंह ने नेमीचंद जैन कैंसर एंड रिसर्च सेंटर में जिस सर्जन के अधीक्षण में यह शिविर आयोजित किया गया उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। इस शिविर में 83 महिलाओं की सर्जरी की गयी थी।

उन्होंने कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना लापरवाही (चिकित्सकों द्वारा) से हुई। एक विस्तृत जांच की जा रही है जिसमें दवाओं की गुणवत्ता, सर्जरी का मानक, आपरेशन के बाद के उपाय सहित सभी कोणों को ध्यान में रखा जायेगा।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

इस बीच विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में कल छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है।

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फिदायीन हमले में 78 स्टूडेंट्स की मौत

पोटिस्कम (नाइजीरिया) उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के एक स्कूल में सोमवार को हुए एक फिदायीन हमले में 78 स्टूडेंट्स की मौत हो गई। इस विस्फोट में 45 अन्य घायल हो गए।

हमलावर स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल में घुसा था और उसने खुद को बम से उड़ा लिया। विस्फोट के वक्त दो हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स पोटिस्कम सिटी स्थित साइंस ऐंड टेक्नॉलजी स्कूल में मौजूद थे।

पुलिस को शक है कि इस हमले का जिम्मेदार चरमपंथी समूह बोको हरम है। इस घटना से नाराज लोगों ने घटनास्थल पर आए पुलिसकर्मियों पर पथराव किया।

गौरतलब है कि नाइजीरिया में पिछले पांच साल से जारी इस्लामी आतंक के कारण हजारों लोगों की मौत हुई है। बोको हरम इस्लामी राज्य स्थापित करने के मकसद से पिछले पांच साल के अपने अभियान में स्कूलों को अक्सर निशाना बनाता रहा है।
बोको हरम वेस्टर्न एजुकेशन सिस्टम का विरोध करता है। इस समूह ने बच्चों को स्कूल जाने से रोकने के लिए अभियान भी चलाया है।

गौरतलब है कि अप्रैल में इसी संगठन ने एक बोर्डिंग स्कूल से 200 से ज्यादा लड़कियों को अगवा कर लिया था। उन लड़कियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पिछले हफ्ते भी पोटिस्कम में एक फिदाईन हमले में 30 लोग मारे गए थे।

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बीजेपी के साथ गठबंधन खत्म? महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठेगी शिवसेना, नेता विपक्ष पद पर किया दावा

मुंबई: महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ मंत्री पद के बंटवारे को लेकर पिछले कई हफ्तों से जारी खींचतान के बाद शिवसेना ने विधानसभा में विपक्ष में बैठने का फैसला कर लिया है। सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधानसभा सचिवालय को चिट्ठी लिख कर बताया कि उनकी पार्टी विधानसभा में विपक्ष में बैठेगी और एकनाथ शिंदे सदन में विपक्ष के नेता होंगे।

शिवसेना प्रवक्ता नीलम गोरहे ने संवाददाताओं से कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की लिखी एक चिट्ठी राज्य विधानसभा सचिव अनंत कलसे को सौंप दिया गया है, जिसमें उन्होंने शिवसेना विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे के लिए विपक्ष के नेता के पद की मांग की है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का लिखा एक पत्र अनंत कलसे को सौंपा गया है, जिसमें उन्हें सूचित किया गया है कि एकनाथ शिंदे को शिवसेना विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘चूंकि हम सदन में 63 विधायकों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं, हमारे नेता को विपक्ष का नेता नियुक्त करना उचित होगा। हम उम्मीद करते हैं कि शिंदे के नाम की घोषणा जल्द से जल्द की जाएगी।’

सोमवार को शुरू हुए विधानसभा के विशेष सत्र में राज्य के नए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के विश्वास मत हासिल करने से ठीक पहले सेना का यह फैसला सामने आया है। वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में आज शिवसेना के विधायक विपक्ष की बेंचों पर बैठे दिखें।

इससे पहले, उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा था कि बीजेपी अगर एनसीपी का समर्थन लेती है, तो शिवसेना महाराष्ट्र में विपक्ष में बैठेगी। हालांकि, शिवसेना ने यह कहकर मेल-मिलाप का दरवाजा भी खुला रखा है कि बीजेपी को इस मुद्दे पर दो दिन के अंदर स्थिति साफ करनी चाहिए।

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मोदी सरकार के 65 मंत्री और उनके विभाग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार रविवार को हो गया. यहां जानिए भारत सरकार के किस मंत्री को कौन-कौन सा मंत्रालय मिला है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: कार्मिक, जनशिकायत, पेंशन, आणविक ऊर्जा, अंतरिक्ष, सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मामले और वे सभी मंत्रालय, जो किसी और मंत्री को नहीं दिए गए हैं.

कैबिनेट मंत्री
1. राजनाथ सिंह- गृह
2. सुषमा स्वराज- विदेश, प्रवासी भारतीय कार्य
3. अरुण जेटली- वित्त, कॉरपोरेट मामले, सूचना एवं प्रसारण
4. एम वैंकेया नायडू – शहरी विकास, आवास, गरीबी उन्मूलन, संसदीय कार्य
5. नितिन जयराम गडकरी – सड़क परिवहन, राष्ट्रीय मार्ग, जहाजरानी
6. मनोहर पर्रिकर- रक्षा
7. सुरेश प्रभु- रेलवे
8. डीवी सदानंद गौड़ा- कानून और न्याय
9. उमा भारती- जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरोद्धार10. नजमा ए हेपतुल्ला- अल्पसंख्यक मामले
11. रामविलास पासवान- उपभोक्ता मामले, खाद्य और जन वितरण
12. कलराज मिश्र- सूक्ष्म, लघु, मध्यम, उद्यम
13. मेनका संजय गांधी- महिला और बाल विकास
14. अनंत कुमार- रसायन और खाद
15. रविशंकर प्रसाद- संचार और सूचना तकनीकी
16. जगत प्रकाश नड्डा- स्वास्थ और परिवार कल्याण
17. अशोक गजपति राजू पूसापति- नागरिक उड्डयन
18. अनंत गीते- भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम
19. हरसिमरत कौर बादल- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
20. नरेंद्र सिंह तोमर- खान, इस्पात
21. चौधरी बीरेंद्र सिंह- ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल और स्वच्छता
22. जुआल ओरम- आदिवासी कल्याण
23. राधा मोहन सिंह- कृषि
24. थावर चंद गहलोत- सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण
25. स्मृति जुबिन ईरानी- मानव संसाधन विकास
26. डॉ. हर्षवर्धन- विज्ञान और तकनीकी, भूविज्ञान

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार के साथ)
27. जनरल वीके सिंह- सांख्यिकी, कार्यक्रम क्रियान्वन (दोनों का स्वतंत्र प्रभार), विदेश, प्रवासी भारतीय कार्य
28. राव इंदरजीत सिंह- नियोजन (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा
29. संतोष कुमार गंगवार- कपड़ा (स्वतंत्र प्रभार)
30. बंडारू दत्तात्रेय- श्रम और रोजगार (स्वतंत्र प्रभार)
31. राजीव प्रताप रूडी- कौशल विकास और उद्यमशीलता (दोनों का स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले
32. श्रीपाद यशो नाइक- आयुष (स्वतंत्र प्रभार), स्वास्थ और परिवार कल्याण
33. धर्मेंद्र प्रधान- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)
34. सर्बानंद सोनोवाल- युवा मामले और खेल (स्वतंत्र प्रभार)
35. प्रकाश जावड़ेकर- पर्यावरण, जंगल और जलवायु में बदलाव (स्वतंत्र प्रभार)
36. पीयूष गोयल- ऊर्जा, कोयला, नई और पुनर्नवीकरण (स्वतंत्र प्रभार)
37. जितेंद्र सिंह- उत्तर पूर्व के इलाके का विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री का दफ्तर, कार्मिक, जनशिकायत, पेंशन, आणविक ऊर्जा, अंतरिक्ष
38. निर्मला सीतारमन- वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार)
39. महेश शर्मा, संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार), नागरिक उड्डयन

राज्य मंत्री
40. मुख्तार अब्बास नकवी- अल्पसंख्यक मामले, संसदीय कार्य
41. रामकृपाल यादव- पेयजल और सफाई
42. हरिभाई पार्थीभाई चौधरी- गृह मंत्रालय
43. सांवर लाल जाट- जल संसाधन, नदी विकास, गंगा पुनरोद्धार
44. मोहनभाई कल्याणजी भाई कुंडरिया-कृषि
45. गिरिराज सिंह- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग
46. हंसराज गंगाराम अहीर- रसायन और उर्वरक
47. जीएम सिद्धास्वरा- भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम
48. मनोज सिन्हा- रेलवे
49. निहाल चंद- पंचायती राज
50. उपेंद्र कुशवाहा – मानव संसाधन विकास
51. राधाकृष्णन पी- सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाजरानी
52. किरण रिजिजू- गृह
53. कृष्ण पाल गुर्जर- सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण
54. संजीव कुमार बाल्यान- कृषि
55. मनसुखभाई धांजीभाई वसावा- आदिवासी मामले
56. रावसाहेब दादाराव दान्वे- उपभोक्ता मामले, खाद्य और जनवितरण
57. विष्णुदेव साय- खान, इस्पात
58. सुदर्शन भगत- ग्रामीण विकास
59. राम शंकर कठेरिया- मानव संसाधन विकास
60. वाई एस चौधरी- विज्ञान और तकनीकी, भूविज्ञान
61. जयंत सिन्हा- वित्त
62. कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़- सूचना और प्रसारण
63. बाबुल सुप्रिया बाराल- शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन
64. साध्वी निरंजन ज्योति- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
65. विजय सांपला- सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

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बिहार में हुई एक अनोखी शादी, सैकड़ों लोग बने गवाह

बंदर रामू और बंदरिया रामदुलारी की शादी की तस्वीर
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में एक अनोखी शादी हुई जिसमें सैकड़ों लोगों ने न केवल शिरकत की बल्कि इस मौके पर आयोजित प्रीति भोज का भी लुत्फ उठाया. यह शादी थी एक बंदर और बंदरिया की. विवाह के लिए शुभ मुहूर्त सोमवार को था, जिसमें बंदर रामू और बंदरिया रामदुलारी की शादी करवाई गई. इस शादी के लिए करीब 300 निमंत्रण कार्ड बांटे गए थे.बेतिया के तीन लालटेन चौक निवासी उदेश महतो ने वर और वधू पक्ष के अभिभावक की भूमिका निभाई. शादी में रामू ने नीला और रामदुलारी ने गुलाबी जोड़ा पहना था. उदेश बताते हैं कि विवाह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ, जिसके बाद प्रीति भोज का भी आयोजन किया गया था.

उदेश को खुशी है कि उन्होंने यह विवाह कराया, लेकिन अफसोस इस बात का है कि बैंड-बाजे वालों के देरी से पहुंचने की वजह से वह बारात नहीं निकाल सके. उन्होंने बताया कि बैंड वालों के इंतजार में शुभ मुहूर्त निकल जाता.

उन्होंने बताया कि रामू बंदर से उनकी मुलाकात करीब सात वर्ष पहले गोवर्धन पर्वत घूमने के दौरान हुई थी. वह उसे अपने घर ले आए और उसे अपने बच्चे की तरह पाला व पहले उसी की शादी कराने का फैसला किया. इसलिए उन्होंने दो साल पहले 2,500 रुपये में रामदुलारी बंदरिया को खरीदा. उदेश बताते हैं कि उनकी शादी के कार्ड भी छपवाए गए थे. शादी में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित 300 लोगों को बुलाया गया था.

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महाराष्ट्र से गुजरातियों का सफाया करना चाहता हूं: नितेश राणे

नितेश राणे
कांग्रेस विधायक नितेश राणे के एक बयान से सियासत में उबाल पैदा हो गया है. नारायण राणे के बेटे नितेश राणे ने नफरत फैलाने वाली भाषा में तंज किया कि वे स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लेना चाहते हैं और वे महाराष्ट्र से गुजरातियों का सफाया करना चाहते हैं. नीतेश राणे ने मचाया उत्पात
नितेश राणे ने ट्व‍िटर पर लिखा, ‘मैं स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लेना चाहता हूं. शुरुआत मुंबई से करना चाहता हूं. मैं यहां से मराठियों से नफरत करने वाले सारे गुज्जुओं का हमेशा के लिए सफाया करना चाहता हूं.’

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रायडू के शतक से जीता भारत, वनडे रैंकिंग में बना नंबर वन

अंबाती रायडू
अंबाती रायडू की नाबाद 121 रन के बूते भारत ने अहमदाबाद वनडे में श्रीलंका को 6 विकेट से हरा दिया. श्रीलंका के 274 रनों का पीछा करते हुए भारत ने 44.3 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 275 रन बना लिए. इस मैच में अंबाती रायडू ने वनडे करियर का पहला शतक जड़ा. उन्होंने 118 गेंदों में 10 चौकों और 4 छक्कों की मदद से नाबाद 121 रन बनाए.भारत ने अजिंक्य रहाणे के रूप में अपना पहला विकेट गंवाया. उन्हें धम्मिका प्रसाद ने विकेट के पीछे स्लिप में जयवर्धने के हाथों कैच आउट कराया. वहीं शिखर धवन 79 रन की पारी खेलकर आउट हो गए.

इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम ने कप्तान एंजिलो मैथ्यूज के नाबाद 92 रन के बूते निर्धारित 50 ओवर में 8 विकेट पर 274 रन बनाए. श्रीलंका की ओर से कुमार संगकारा ने 61 रन की जुझारू पारी खेली. भारत के लिए उमेश यादव, अक्षर पटेल और आर अश्विन ने 2-2 विकेट झटके. वहीं रवींद्र जडेजा को एक विकेट मिला.

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सचिन को टीम से निकालना चाहते थे चैपलः सौरव गांगुली

FILE PHOTO: सौरव गांगुली और ग्रेग चैपल
सौरव गांगुली ने एक बहुत बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि ग्रेग चैपल टीम इंडिया से सचिन तेंदुलकर को निकालना चाहते थे. गांगुली ने बताया कि वो इसके लिए राजी नहीं थे तभी उनसे कप्तानी ले ली गई थी.सौरव गांगुली ने बताया, ‘चैपल मेरी कप्तानी की शिकायत मेरे पीछे दूसरे प्लेयर्स से मेरी कप्तानी की शिकायत करते थे जिसके बारे में मैंने सेलेक्टर्स को बता दिया था. मुझे आज भी मुंबई में हुई वो मीटिंग याद है, तब मैंने ये ही बातें उठाई थीं. मुझे कप्तानी से हटाया गया क्योंकि तब मुझे कई सीनियर प्लेयर्स को टीम से हटाने को कहा गया था लेकिन मैंने इसके लिए साफ मना कर दिया था. तब मुझे सचिन, लक्ष्मण, जहीर, हरभजन और सहवाग को हटाने को कहा गया था. मैंने साफ मना कर दिया कि आप अचानक ऐसा नहीं कर सकते.’

सौरव ने साफ कहा कि सचिन ने खुद अपनी किताब में इसके बारे में लिखा है. इसलिए अब इस बात के सामने आने पर यह मेरे लिए आश्चर्यजनक नहीं है. तब जिम्बाब्वे दौरे के बाद टीम से मुझे ही निकाल दिया गया और अब सचिन ये बातें सभी के सामने लेकर आए हैं. तो मुझे पता है कि ये बातें कहां से आ रही हैं.’

गांगुली ने कहा, ‘2005 में मैंने कप्तानी खोई, तब भी मामला वही था और 2007 में वर्ल्ड कप से पहले भी. मुझे द्रविड़ के लिए अफसोस है क्योंकि यह सही नहीं है कि जब आप कप्तान होते हैं तो कोई आपके पीठ पीछे आपकी कप्तानी पर सवाल उठाए. मुझे यह भी पता है कि उसने मेरी कप्तानी के दौरान भी ऐसा ही किया. तब उसने राहुल से ऐसा कहा था. यह किसी के लिए भी बहुत दुखद है. मुझे चैपल और भारतीय क्रिकेट दोनों के लिए अफसोस है कि उन्होंने क्रिकेट के स्तर को इस हद तक गिरा दिया.’

गांगुली ने आगे कहा, ‘मुझे नहीं पता कि चैपल के दिमाग में क्या चल रहा था? वो भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए आए थे या इन सभी अनावश्यक चीजों को करने. मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि मैं तब भारतीय क्रिकेट का हिस्सा था जब पीछे ये सब चल रहा था.’

जब गांगुली से ये पूछा गया कि क्या सचिन ने अपनी किताब में जो लिखा है कि वो भारतीय क्रिकेट को कंट्रोल करना चाहते थे तो गांगुली ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि क्या ये क्रिकेट का ऑस्ट्रेलियाई तरीका है. हमारे पास जॉन राइट और गैरी कर्स्टन जैसे सफल विदेशी कोच रह चुके हैं, लेकिन मैं हमेशा अपने देश के कोच का फैन रहा हूं.’

तब कोई सामने नहीं आया. क्या सीनियर प्लेयर्स ग्रेग चैपल से भयभीत थे? यह पूछने पर गांगुली ने कहा, ‘कभी-कभी एक खिलाड़ी के रूप में आप विवाद में नहीं पड़ना चाहते. आप इससे दूर रहना चाहते हैं. मैं समझ सकता हूं कि तब चुप्पी क्यों साधी गई. उन्हें यह दिख चुका था कि मेरे साथ क्या हुआ. सीरीज जीतने और टेस्ट में सेंचुरी लगाने के बाद भी मैंने अपनी कप्तानी खोई. उसके बाद मैं कभी भारत के लिए कप्तानी नहीं कर सका. उस समय दुनिया का बेस्ट वनडे प्लेयर होने के बाद भी मैं कभी वनडे नहीं खेल सका. उन्हें ये सब दिख चुका था. वो रिस्क नहीं लेना चाहते थे, और विवादों से दूर रहना स्वाभाविक था. मैं उन्हें दोष नहीं देता. मुझे टीम के खिलाड़ियों की वजह से हटाया गया यह मैं नहीं मानता. मेरे बाहर होने के पीछे न तो सचिन और न ही द्रविड़ थे.’

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ग्रेग चैपल का पलटवार, सचिन का दावा झूठा

नई दिल्ली। सचिन तेंदुलकर की किताब में ग्रेग चैपल पर लगाए आरोपों का चैपल ने जवाब दिया है उन्होंने सचिन के दावों को नकार दिया है। ग्रेग चैपल ने कहा है कि वो सचिन के किताब में हुए खुलासे से हैरान हैं। उनका दावा है कि उन्होंने कभी भी द्रविड़ की जगह सचिन को कप्तान बनाने का प्रस्ताव नहीं दिया था।

हिटलर की तरह पेश आते थे चैपल: सचिन

चैपल के मुताबिक उन्होंने 2007 के विश्व कप के पहले कप्तानी में बदलाव की कोई कोशिश नहीं की थी। तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा प्लेइंग इट माई वे में लिखा है कि 2007 के विश्वकप के पहले ग्रेग चैपल उनके घर आए थे और उन्हें इस बात के लिए राजी करने की कोशिश की थी वो टीम इंडयिा की कमान संभाल लें।

टीम इंडिया के खिलाफ साजिश कर रहे थे चैपल!

लेकिन चैपल का कहना है कि वो सिर्फ एक बार सचिन के घर गए थे और वो भी टीम के फिजियो और अस्टिंटेंट कोट के साथ। चैपल का दावा है कि जिस वक्त वो सचिन के घर गए थे वो किताब में लिखे वक्त से काफी पहले का है।

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