|   शपथ ग्रहण समारोह के लिए रांची तैयार: ...     |   मोदी का आना तय, एसपीजी टीम पहुंची: ...     |   झारखंड में ‘रघुवर राज’: ...     |   झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला: ...     |   मोदी और नवाज शरीफ के बीच मुलाकात पर सुषमा स्वराज ने कहा, ‘कल तक इंतजार कीजिए।’: ...     |   पीएम मोदी की पत्नी जशोदाबेन ने आरटीआई आवेदन दायर कर सुरक्षा कवर की मांगी जानकारी: ...     |   सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, बीसीसीआई अध्यक्ष कैसे अपनी खुद की आईपीएल टीम रख सकता है: ...     |   छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश पर रोक को लेकर विवाद, सरकार ने AMU से स्पष्टीकरण मांगा: ...     |   छत्तीसगढ़ मे नसबंदी के बाद 11महिलाओं की मौत, 4 निलंबित: ...     |   फिदायीन हमले में 78 स्टूडेंट्स की मौत: ...    

शपथ ग्रहण समारोह के लिए रांची तैयार

रघुवर  के साथ 4 विघायक लेगें  शपथ

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मोदी का आना तय, एसपीजी टीम पहुंची

संवाददाता
रांची : रघुवर दास के राजतिलक के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पहुंचना तय हो गया है। पीएम की सुरक्षा में लगे एसपीजी की 28 सदस्यीय टीम शुक्रवार की देर शाम वायुसेना के विशेष विमान से रांची पहुंच गयी। डीआइजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में पहुंचे इस दल के साथ पीएम के वाहनों का पूरा काफिला भी रांची पहुंच गया है। 28 दिसंबर को मोरहाबादी स्थित फुटबॉल ग्राउंड में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में पीएम के अतिरिक्त आठ राज्यों के मुख्यमंत्री और 16 केंद्रीय मंत्रियों के भी शामिल होने की खबर है। वीवीआईपी के शामिल होने के कारण एसपीजी ने तैयारी शुरू कर दी है। रात में ही एसपीजी की टीम जिला पुलिस के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित समारोह स्थल मोरहाबादी फुटबॉल ग्राउंड पहुंची और पूरे मैदान का जायजा लिया। इसके बाद एसपीजी ने समारोह स्थल को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। शनिवार को पीएम के कार्यक्रम का पूर्वाभ्यास होगा। प्रधानमंत्री विशेष विमान से बिरसा मुंडा हवाई अड्डा पहुंचेंगे और वहां से चौपड़ से मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे। वहीं दूसरी ओर जिला पुलिस-प्रशासन भी पीएम के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए रेस हो गयी है। सभी स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गयी है।

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झारखंड में ‘रघुवर राज’

नाम : रघुवर दास
पिता : स्व. चवन राम
जन्म : 3 मई 1955, जमशेदपुर
शिक्षा : भालूबासा हरिजन विद्यालय, जमशेदपुर से प्रारंभिक शिक्षा। इसी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। जमशेदपुर को-आॅपरेटिव कालेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसी कालेज से इन्होंने स्नातक विधि की परीक्षा पास की।
कार्य: स्नातक में सफलता हासिल करने के बाद टाटा स्टील में श्रमिक के रूप में कार्य प्रारंभ किया, जो अभी तक जारी है।
राजनीतिक गतिविधि : छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति की सेवा का माध्यम बनाया। छात्र संघर्ष समिति के संयोजक की भूमिका निभाते हुए जमशेदपुर में विश्वविद्यालय स्थापना के आंदोलन में भाग लिया।
’लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन का जमशेदपुर में नेतृत्व किया। फलत: गया जेल में रखे गये। वहां इनकी मुलाकात प्रदेश के कई शीर्ष नेताओं से हुई। श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाये गये आपातकाल में भी उन्होंने जेल की यात्रा की।
’1977 में श्री दास जनता पार्टी के सदस्य बने।
’1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के साथ ही इन्होंने सक्रिय राजनीति की शुरूआत की। मुंबई में हुए भाजपा के प्रथम राष्टÑीय अधिवेशन में 1980 में भाग लिया।
’जमशेदपुर में सीतारामडेरा भाजपा मंडल के अध्यक्ष बनाये गये। फिर महानगर जमशेदपुर के महामंत्री व तत्पश्चात उपाध्यक्ष बनाये गये।
जन प्रतिनिधित्व : भाजपा ने प्रथम बार 1995 में रघुवर दास को जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और जनता ने इन्हें अपना प्रतिनिधि चुना। यह क्रम लगातार अभी तक जारी है। 1995 में से अब तक ये जन प्रतिनिधि के रूप में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भाजपा का नेतृत्व : 2005 में विधानसभा क्षेत्र का चुनाव होने के पूर्व श्री दास को 2004-05 में झारखंड प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। इनके नेतृत्व में झारखंड विधानसभा चुनाव लड़ा गया और भाजपा राज्य में 30 सीटों पर विजय हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। वर्ष 2009 के चुनाव के पूर्व इन्हें दोबारा भाजपा अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। 16 अगस्त 2014 को अमित शाह की अध्यक्षता में गठित भारतीय जनता पार्टी की राष्टÑीय कार्यकारिणी में इन्हें उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
प्रशासनिक दायित्व : 2000 में बिहार का विभाजन कर झारखंड अलग राज्य बनाया गया। झारखंड सरकार में रघुवर दास श्रम नियोजन मंत्री बनाये गये। इसके बाद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में बनी सरकार में इन्हें भवन निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया। 2005 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में जब भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी तो श्री दास को वित्त, नगर विकास व वाणिज्य कर विभाग का मंत्री बनाया गया। 2009 में झारखंड में जब झामुमो और एनडीए की सरकार शिबू सोरेन के नेतृत्व में बनी तो इन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया तथा वित्त वाणिज्य कर, ऊर्जा, नगर विकास, आवास एवं संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों के दायित्व सौंपे गये।
दायित्व
’    15 नवंबर 2000 से 17 मार्च     2003 तक : श्रम एवं नियोजन     मंत्री
’    मार्च 2003 से 14 जुलाई         2004 तक : भवन निर्माण मंत्री
’जुलाई 2004 से मई 2005 तक     : झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
’12 मार्च 2005 से 14 सितंबर     2004 तक : वित्त वाणिज्य         एवं नगर विकास मंत्री
’19 जनवरी 2009 से 15         सितंबर 2010 तक : प्रदेश         भाजपा अध्यक्ष
’30 दिसंबर 2009 से 30 मई         2010 तक : उप मुख्यमंत्री,         वित्त, वाणिज्य कर, ऊर्जा, नगर     विकास, आवास एवं संसदीय         कार्य मंत्री
’16 अगस्त 2014 से : राष्टÑीय         उपाध्यक्ष, भाजपा।

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झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला

रांची: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू झारखंड में भी सिर चढ़कर बोला।  इसी का नतीजा है कि झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है। मंगलवार को विधानसभा चुनाव का परिणाम आया, जिसमें भाजपा को 37 और आजसू को 5 सीटें मिली हैं। यानी गठबंधन 42 सीटों पर जीता है। बुधवार को दिल्ली में भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई गई है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी। झारखंड में अगली सरकार भाजपा के नेतृत्व में बननी तय है। सरकार में आजसू पार्टी भी शामिल होगी। बुधवार को तय हो सकता है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। अर्जुन मुंडा के चुनाव हारने के बाद भाजपा के राष्टÑीय उपाध्यक्ष रघुवर दास मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। सीपी सिंह और सरयू राय के नाम भी चर्चा में हैं। झारखंड का चुनाव परिणाम भारी उलटफेर वाला रहा। शुरुआती रुझान में एनडीए को 50 से ऊपर सीटें जाती दिख रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती बढ़ी, भाजपा की बढ़त भी कम हो गई। हालांकि बहुमत का आंकड़ा पार करने में बीजेपी कामयाब हो गई। झारखंड की राजनीति के दिग्गज माने जानेवाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, बाबूलाल मरांडी व मधु कोड़ा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हेमंत सोरेन बरहेट से जीतने में सफल रहे। हेमंत और मरांडी दो-दो सीटों पर चुनाव लड़े थे। चुनाव के दौरान भाजपा सिर्फ नरेंद्र मोदी पर ही टिकी नजर आ रही  थी। उनकी सभाओं में उमड़ी भीड़ को देखर प्रत्याशी जीत के प्रति आश्वास्त भी थे। राज्य में मुख्य मुकाबला भाजपा और झामुमो के बीच ही रहा। झामुमो ने 2009 के प्रदर्शन को न सिर्फ बरकरार रखा, बल्कि एक सीट का इजाफा भी किया। भाजपा 18 से बढ़कर 37 सीट पर पहुंच गई। कांग्रेस 14 सीटों से घटकर छह पर आ गई। झारखंड की जनता ने यूपीए गंठबंधन को नकार दिया। राजद और जदयू जैसे दलों का सूपड़ा साफ हो गया। आजसू को एक सीट का नुकसान हुआ। वामदलों ने अपनी पुरानी स्थिति बरकरार रखते हुए दो सीटें जीती हैं।
हेमंत मंत्रिमंडल का सफाया
मंत्री जयप्रकाश भाई पटेल और चम्पई सोरेन को छोड़ सरकार के बाकी 10 मंत्री चुनाव हार गये हैं। हारनेवाले मंत्रियों में राजेंद्र सिंह, अन्नपूर्णा देवी, चंपई सोरेन, हाजी हुसैन अंसारी, सुरेश पासवान, बन्ना गुप्ता, केएन त्रिपाठी, लोबिन हेम्ब्रम, मन्नान मल्लिक और गीताश्री उरांव शामिल हैं। कई बड़े नाम भी हार गये। हेमलाल मुर्मू, साइमन मरांडी, समरेश सिंह, अरविंद सिंह, महुआ माजी सहित कई नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है।
………
झारखंड की जनता ने विकास के वादे पर अपनी मुहर लगाई है। भाजपा पर विश्वास जताने के लिए झारखंड की जनता को धन्यवाद।
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री (ट्विटर पर)
…………
यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत है: सरयू राय
जमशेदपुर पूर्वी के भाजपा प्रत्याशी सरयू राय ने जीत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत है। विकास के लिए झारखंड के लोगों ने भाजपा को वोट दिया है। मुख्यमंत्री के मसले पर आलाकमान निर्णय लेगा। इसका फैसला विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा।
………..
मुख्यमंत्री के लिए रघुवर दास का नाम सबसे आगे
भाजपा ने राज्य में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने के संकेत दिए है। ऐसे में झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की हार के बाद रघुवर दास मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे है। रघुवर दास मुंडा सरकार में मंत्री रह चुके है। उनके साथ वरिष्ठ नेता सरयू राय, सीपी सिंह के नाम भी चर्चा में है। आदिवासी मुख्यमंत्री के बारे में विचार होने की स्थिति में केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत और और गुमला से जीते शिव शंकर उरांव का नाम सामने आ सकता है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी किसी भी लोकसभा सांसद को राज्य में भेजने के पक्ष में नहीं है।
झारखंड में दलों को प्राप्त वोट
बीजेपी (31.3%)
जेएमएम (20.4%)
आईएनसी 10.4%,1448064त्न
जेवीएम (10.0%)
आईएनडी (6.7%)
एजेएसयूपी (3.7%)
आरजेडी (3.1%)
बीएसपी (1.8%)
सीपीआई(एमएल)(एल) (1.5%)
जेकेपी (1.1%)
………………
जम्मू कश्मीर में किसी को भी नहीं मिला जनादेश
जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया है, जिसमें पीडीपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और सरकार बनाने की बहुत सी संभावनाएं खुली हैं। पीडीपी 28 सीटों के साथ सरकार बनाने की होड़ में सबसे आगे है और ऐसा लगता है कि पार्टी सभी विकल्प खुले रखे हुए है। कमोवेश यही स्थिति भाजपा की है, जिसे 25 सीटें मिली हैं, जो सभी जम्मू क्षेत्र से हैं। पार्टी ने राज्य में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत और उसके बाद महाराष्टÑ और हरियाणा विधानसभा में जीत के बाद झारखंड की इस जीत ने भाजपा के विजय इतिहास में एक और सफा जोड़ दिया है। जम्मू कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा के लिए भाजपा ने मिशन 44प्लस को लेकर एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वहां जमकर प्रचार किया, लेकिन घाटी और लद्दाख के मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहे, जहां की 50 सीटों पर पार्टी के हाथ कुछ नहीं लगा।

हालांकि पार्टी ने 2008 की 11 सीटों के मुकाबले 25 सीटें जीतीं और उसके लिए सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने की संभावनाएं खुली हैं। पीडीपी की सीटों की   संख्या 21 से बढ़कर 28 हो गई। सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस को चुनाव परिणामों से तगड़ा झटका लगा। पार्टी को पिछले चुनाव में 28 सीटें मिली थीं, जो घटकर 19 रह गईं। मुख्यमंत्री और एनसी के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला सोनावार सीट से चुनाव हार गए और बीरवाह सीट जैसे तैसे बचाने में कामयाब रहे उन्हें 1000 से कुछ अधिक वोट से जीत मिली।

जम्मू कश्मीर में एनसी के साथ सत्ता में भागीदार कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर सरक गई है। पार्टी के पास पिछली विधानसभा में 17 सीटें थीं। पूर्व पथकतावादी सज्जाद लोन की जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस ने दो सीटें जीती हैं, जबकि जेकेपीडीएफ (सेक्यूलर) और सीपीआईएम को एक एक सीट मिली है। निदर्लीय उम्मीदवार तीन स्थानों पर विजयी रहे हैं।

नतीजों के बाद विभिन्न दलों की स्थिति साफ हो गई है और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि उनकी पार्टी के लिए सभी तीनों विकल्प खुले हैं। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि सरकार बनाने का विकल्प, सरकार को समर्थन देने का विकल्प और सरकार में शामिल होने का विकल्प, सभी खुले हैं। अन्य सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि अब यह कयास मीडिया को लगाना है कि भाजपा क्या करेगी। स्थिति पर विचार के लिए पार्टी के संसदीय बोर्ड की कल बैठक होगी।

श्रीनगर में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी सबको अटकलों के बीच छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता जोड़ तोड़ करके सरकार बनाना नहीं है। संभावनाओं का पता लगाने और सरकार बनाने में समय लगेगा ताकि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके। यह कहना मुश्किल है कि ऐसा कब होगा।

निवतर्मान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपने पत्ते नहीं खोले और सिर्फ इतना दावा किया कि मौजूदा हालात में नेशनल कांफ्रेंस की अनदेखी नहीं की जा सकती। आने वाले कुछ दिनों में जम्मू और कश्मीर में जो कुछ भी होगा एनसी उसमें एक बड़ी खिलाड़ी होगी।

यह जानना दिलचस्प होगा कि जम्मू और कश्मीर में वोटों के बंटवारे के लिहाज से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। घाटी और लद्दाख में भले ही पार्टी का खाता नहीं खुल पाया, लेकिन पार्टी 23 प्रतिशत वोट लेकर सबसे आगे रही। पीडीपी को 22.7 प्रतिशत, नेशनल कांफ्रेंस को 20.8 प्रतिशत और कांग्रेस को 18 प्रतिशत वोट मिले।

जम्मू कश्मीर में दलों को प्राप्त वोट
बीजेपी (23.0%)
जेकेपीडीपी (22.7%)
जेकेएन (20.8%)
आईएनसी (18.0%)
आईएनडी (6.8%)
जेकेएनपीपी (2.0%)
जेपीसी (1.9%)
बीएसपी (1.4%)
जेकेपीडीएफ (0.7%)
जेकेडीपीएन (0.5%)

सरकार के समीकरण
जम्मू-कश्मीर
1. भाजपा (25) + पीडीपी (28) = 53
वजह : ये दोनों पाटिर्यां पहले से भी एकदूसरे की दुश्मन नहीं हैं
2. भाजपा (25) + एनसी (15) + अन्य (7) = 47
वजह : एनसी के लिए भाजपा का साथ पीडीपी से ज्यादा फायदेमंद
3. पीडीपी (28) + कांग्रेस (12) + अन्य (7) = 47
वजह : गुलाम नबी आजाद ने पीडीपी को समर्थन के संकेत दिए हैं

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मोदी और नवाज शरीफ के बीच मुलाकात पर सुषमा स्वराज ने कहा, ‘कल तक इंतजार कीजिए।’

काठमांडू: भारत ने आज दक्षेस शिखर वार्ता से इतर नेपाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच मुलाकात की संभावना से इनकार नहीं किया। इस संबंध में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, ‘कल तक इंतजार कीजिए।’

अठारहवीं दक्षेस शिखर वार्ता में शामिल होने के लिए आज यहां पहुंची सुषमा स्वराज ने कहा कि वह जुलाई में अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के केवल साढ़े तीन महीने बाद नेपाल आकर खुश हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और शरीफ के बीच मुलाकात की संभावना के बारे में पूछे जाने पर सुषमा ने कहा, ‘कल तक इंतजार कीजिए।’ दक्षेस के इतर द्विपक्षीय मुलाकात के सवाल के जवाब में शरीफ के विदेश तथा राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा, ‘देखिए, मुझे लगता है कि एक या दो (बैठक) तय हैं। अन्य अभी तय नहीं हैं।’

मोदी-शरीफ मुलाकात की संभावना पर उन्होंने कहा, ‘अब तक कोई योजना नहीं है।’ और ज्यादा पूछे जाने पर, अजीज ने कहा, ‘अगर दूसरे पक्ष से (बैठक के लिए) पहल होती है।’ सुषमा से संभावित मुलाकात पर अजीज ने कहा, ‘देखिए, अगर वह आग्रह करती हैं, तो मैं (मुलाकात) करूंगा।’

यह पूछे जाने पर कि क्या शिखर वार्ता भारत-पाक रिश्तों के साये में होगी, अजीज ने कहा, ‘मुझे आशा है कि नहीं। दक्षेस ज्यादा महत्वपूर्ण है..’

सुषमा और अजीज के बयान ऐसे समय आए हैं जब पाकिस्तानी मीडिया ने खबर दी थी कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री बुधवार को दक्षेस शिखर वार्ता के इतर मुलाकात कर सकते हैं।

एक अधिकारी के हवाले से ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने खबर दी, ‘दोनों प्रधानमंत्री काठमांडो में ‘रिट्रीट सेरेमनी’ के दौरान एक दूसरे के सामने आएंगे।’ परंपरा के अनुसार, दक्षेस शिखर वार्ता में शामिल होने वाले राष्ट्रों और सरकारों के प्रमुखों को द्विपक्षीय बैठकों के लिए अच्छा माहौल बनाने के लिए सम्मेलन के उद्घाटन के बाद ‘रिट्रीट’ (सैर सपाटे) के लिए ले जाया जाता है।

गौरतलब है कि भारत ने अगस्त में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित द्वारा कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत करने के बाद पड़ोसी देश के साथ विदेश सचिव स्तरीय वार्ता रद्द की थी।

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पीएम मोदी की पत्नी जशोदाबेन ने आरटीआई आवेदन दायर कर सुरक्षा कवर की मांगी जानकारी

गुजरात में मेहसाणा जिले के ऊंझा स्थित ब्राह्मणवाड़ा गांव में रह रही जशोदाबेन ने तीन पन्नों के अपने आवेदन में कहा, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी हूं और मैं जानना चाहती हूं कि प्रोटोकॉल के मुताबिक सुरक्षा कवर के अलावा मैं और कौन सी सुविधाओं की हकदार हूं।’ इसके साथ ही उन्होंने शिकायत की है, ‘मैं तो सार्वजनिक वाहन में सफर करती हूं, जबकि मेरे निजी सुरक्षाकर्मी सरकारी गाड़ियों में सफर करते हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, बीसीसीआई अध्यक्ष कैसे अपनी खुद की आईपीएल टीम रख सकता है

नई दिल्ली: बीसीसीआई के निर्वासित चल रहे अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज सख्त टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा है कि क्या श्रीनिवासन मान रहे हैं कि वह बरी हो गए हैं। इससे साफ है कि फिलहाल श्रीनिवासन को कोई राहत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन द्वारा  (आईपीएल) में फ्रेंचाइजी के मालिकाना हक को लेकर हितों के टकराव पर जवाब मांगा। न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘आप इस सारे कार्यक्रम का प्रबंधन देख रहे हैं। आपके पास आईपीएल की एक फ्रेंचाइजी का मालिकाना हक भी है। आप आईपीएल की चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक हैं। क्या यह हितों का टकराव नहीं है।’

मुद्गल कमेटी रिपोर्ट से जुड़ी सुनवाई के दौरान बीसीसीआई को कड़ी फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या आप क्रिकेट को खत्म होते देखना चाहते हैं।

बीसीसीआई ने जब कोर्ट में कहा कि मुद्गल कमेटी रिपोर्ट में श्रीनिवासन के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया है तो सुप्रीम कोर्ट ने कई गंभीर बातें कहीं। कोर्ट ने कहा कि क्रिकेट जेंटलमेन्स गेम है। यह खेल देश में एक धर्म की तरह है और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है।

मैच फिक्सिंग और बेटिंग की ओर इशारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी गतिविधियां चलती रहीं तो क्रिकेट खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि पहचान मैदान में मौजूद लाखों प्रशंसकों से मिलती है और अगर लोगों को पता चल जाए को मैच फिक्स है तो कोई भी दर्शक स्टेडियम में नहीं घुसेगा।

कोर्ट ने कहा कि बेनेफिट ऑफ़ डाउट यानी संदेह का लाभ खेल को दिया जा सकता है, किसी व्यक्ति विशेष को नहीं। कोर्ट ने आईपीएल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये एक आपसी सहयोग से जुड़ी सोसायटी बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हितों के टकराव का सवाल उठाते हुए कहा कि जब श्रीनिवासन बीसीसीआई के अध्यक्ष थे तो वह आईपीएल से जुड़ी टीम के मालिक कैसे हो गए। कोर्ट ने साफ कहा कि आपको यानी बीसीसीआई को संदेहों से परे होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह मुद्गल कमेटी रिपोर्ट की जांच को सही मान रही है।

मुद्गल कमेटी रिपोर्ट क्या है:-

  • आईपीएल में बेटिंग के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी।
  • कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बीसीसीआई और आईपीएल से जुड़े अधिकारियों और खिलाड़ियों की भूमिका की जांच की।
  • कमेटी की सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई, जिसमें कुछ अधिकारियों और खिलाड़ियों पर टिप्पणी है।
  • खिलाड़ियों के नामों का तो अभी तक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन तीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई है। ये हैं चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक और एन श्रीनिवासन के दामाद रहे गुरुनाथ मयप्पन। जांच में मयप्पन बेटिंग के दोषी पाए गए हैं।
  • जांच के मुताबिक, आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन ने कमेटी से जानकारी छुपाई और वह एक सट्टेबाज़ के संपर्क में थे।
  • जांच में राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा भी बेटिंग में शामिल पाए गए हैं।
  • मुद्गल कमेटी रिपोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे एन श्रीनिवासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं
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छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश पर रोक को लेकर विवाद, सरकार ने AMU से स्पष्टीकरण मांगा

नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति जमीरूद्दीन शाह के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया कि पुस्तकालय में स्नातक की छात्राओं को प्रवेश की अनुमति देने के बाद ‘अधिक संख्या’ में लड़के आने लगेंगे। उनके इस बयान के बाद सरकार ने मंगलवार को विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यह ‘बेटियों के अपमान’ की तरह है।

स्नातक की लड़कियों पर प्रतिबंध को लेकर विवाद के घेरे में आए एएमयू ने जगह की कमी का हवाला दिया और ‘लैंगिक भेदभाव’ के आरोपों से इंकार किया। इसका गंभीर संज्ञान लेते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने एएमयू के उपकुलपति जमीरूद्दीन शाह से जवाब मांगा है और ईरानी ने कहा कि शिक्षा एवं संवैधानिक अधिकार सभी के लिए बराबर है।

ईरानी ने दिल्ली में एक समारोह के इतर कहा, ‘ऐसी खबर है जो महिला के तौर पर आहत करती है और आंदोलित भी करती है कि जब हमें स्वतंत्रता मिली तो माना जाता था कि शिक्षा एवं संवैधानिक अधिकार सभी के लिए बराबर है.. और अब हमें ऐसी खबरें मिल रही हैं जो बेटियों के अपमान की तरह है।’ आलोचनाओं का सामना कर रहे उपकुलपति ने जवाब दिया कि परिसर के बाहर महिला कॉलेज में पढ़ रही छात्रओं को 1960 में मौलाना आजाद पुस्ताकलय की स्थापना के समय से ही प्रवेश प्रतिबंधित है और यह ‘नया प्रतिबंध नहीं’ है।

उन्होंने कहा कि 4000 से ज्यादा स्नातक की छात्राएं हैं और जगह की कमी के कारण वे पुस्तकालय में नहीं बैठ सकतीं। उनकी इस टिप्पणी का कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने कड़ा विरोध किया कि अगर लड़कियों को अनुमति दी जाती है तो पुस्तकालय में ‘अधिक लड़के’ आएंगे। शाह ने कहा कि ‘मौलाना आजाद पुस्तकालय की स्थापना के समय से ही सभी परास्नातक लड़कियों एवं महिला शोधार्थियों को यहां आने की अनुमति है।’ उन्होंने लैंगिक भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘न केवल भ्रामक बल्कि शरारतपूर्ण और मानहानिपूर्ण’ करार दिया।

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने उपकुलपति की टिप्पणी को ‘भयावह’ एवं ‘स्तब्धकारी’ करार दिया जबकि मंत्रालय में नये राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां ‘सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं’ हैं। हेपतुल्ला ने कहा, ‘मैं इसे भयावह मानती हूं खासकर मौलाना आजाद की जयंती के अवसर पर। आजाद ने 62 वर्ष पहले लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया था। मैं वास्तव में आश्चर्यचकित हूं। आज के दिन किसी संस्थान का प्रमुख इस तरह की बात करे तो यह स्तब्ध करने वाला है।’ सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि मुद्दे के समाधान के बजाए ‘किसी को जाने से (पुस्तकालय में) रोकना ठीक नहीं है। व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि सभी विद्यार्थी पुस्तकालय जाएं और अध्ययन कर सकें।’

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छत्तीसगढ़ मे नसबंदी के बाद 11महिलाओं की मौत, 4 निलंबित

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सरकार द्वारा संचालित एक शिविर में नसबंदी के बाद उत्पन्न जटिलताओं के चलते जान गंवाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 11 हो गई है जबकि लगभग 50 अन्य को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सरकार ने चार चिकित्सकों को निलंबित कर दिया है जबकि स्वास्थ्य सेवा निदेशक का स्थानांतरण किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) के चार चिकित्सकों के एक दल को पीड़ित महिलाओं के उपचार के लिए एक विशेष विमान से बिलासपुर भेजा जा रहा है।

बिलासपुर जिले के कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने बताया कि जिले के सकरी (पेंडारी) गांव में शनिवार को एक निजी अस्पताल में शासकीय परिवार कल्याण स्वास्थ्य शिविर में 83 महिलाओं का आपरेशन किया गया था। बाद में 60 महिलाओं ने उल्टी और सिरदर्द की शिकायत की तब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

उन्होंने बताया कि अभी तक इस घटना में 11 महिलाओं की मौत हो गई है। जान गंवाने वाली सभी महिलाओं की उम्र 32 साल से कम है। बिलासपुर में नसबंदी के दौरान महिलाओं की मौत के मामलों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से पूरे मामले में विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो 10 दिन की तीन देशों की विदेश यात्रा पर आज रवाना हुए, ने इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे पर म्यांमार से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से बात की और इस घटना के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने सिंह से इस संबंध में गहन जांच और कार्रवाई करने को कहा।

आसियान और पूर्व एशिया शिखर-सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज सुबह म्यांमार रवाना हुए और इस देश की राजधानी ने पई ताव पहुंचे मोदी ने इस मामले में सिंह से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर बताया, ‘प्रधानमंत्री ने बिलासपुर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह से बात की। प्रधानमंत्री ने दुखद घटना पर चिंता प्रकट की।’ विपक्षी कांग्रेस की आलोचना के निशाने पर आये मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच में दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य शासन ने स्वास्थ्य सेवा निदेशक डाक्टर कमलप्रीत को हटा दिया तथा इस मामले में लापरवाही बरतने के कारण स्वास्थ्य विभाग के चार अधिकारियों परिवार कल्याण कार्यक्रम के राज्य समन्वयक डाक्टर के. सी. ओराम, बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर एस. सी. भांगे, तखतपुर के खंड चिकित्सा अधिकारी डाक्टर प्रमोद तिवारी और एक सरकारी सर्जन डाक्टर आर. के. गुप्ता को निलंबित कर दिया।

रमन सिंह ने नेमीचंद जैन कैंसर एंड रिसर्च सेंटर में जिस सर्जन के अधीक्षण में यह शिविर आयोजित किया गया उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। इस शिविर में 83 महिलाओं की सर्जरी की गयी थी।

उन्होंने कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह घटना लापरवाही (चिकित्सकों द्वारा) से हुई। एक विस्तृत जांच की जा रही है जिसमें दवाओं की गुणवत्ता, सर्जरी का मानक, आपरेशन के बाद के उपाय सहित सभी कोणों को ध्यान में रखा जायेगा।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

इस बीच विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में कल छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है।

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फिदायीन हमले में 78 स्टूडेंट्स की मौत

पोटिस्कम (नाइजीरिया) उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के एक स्कूल में सोमवार को हुए एक फिदायीन हमले में 78 स्टूडेंट्स की मौत हो गई। इस विस्फोट में 45 अन्य घायल हो गए।

हमलावर स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल में घुसा था और उसने खुद को बम से उड़ा लिया। विस्फोट के वक्त दो हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स पोटिस्कम सिटी स्थित साइंस ऐंड टेक्नॉलजी स्कूल में मौजूद थे।

पुलिस को शक है कि इस हमले का जिम्मेदार चरमपंथी समूह बोको हरम है। इस घटना से नाराज लोगों ने घटनास्थल पर आए पुलिसकर्मियों पर पथराव किया।

गौरतलब है कि नाइजीरिया में पिछले पांच साल से जारी इस्लामी आतंक के कारण हजारों लोगों की मौत हुई है। बोको हरम इस्लामी राज्य स्थापित करने के मकसद से पिछले पांच साल के अपने अभियान में स्कूलों को अक्सर निशाना बनाता रहा है।
बोको हरम वेस्टर्न एजुकेशन सिस्टम का विरोध करता है। इस समूह ने बच्चों को स्कूल जाने से रोकने के लिए अभियान भी चलाया है।

गौरतलब है कि अप्रैल में इसी संगठन ने एक बोर्डिंग स्कूल से 200 से ज्यादा लड़कियों को अगवा कर लिया था। उन लड़कियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पिछले हफ्ते भी पोटिस्कम में एक फिदाईन हमले में 30 लोग मारे गए थे।

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